1-भजन
जय गोविन्द जय गोपाल
मङ्गलाचरण
राधारमणपादाब्जे भक्तिमार्गप्रदायिने ।
दयानिधे नमस्तुभ्यं गोविन्दाय नमो नमः ॥
राधारमणका चरणकमलमा भक्तिमार्ग प्रदान गर्ने दयाका सागर गोविन्दलाई बारम्बार नमस्कार गर्दछु।
राग: यमन ताल: केहरवा
जय गोविन्द जय गोपाल, जय गोपीजनवल्लभ ।
वृन्दावनको श्यामसुन्दर, भक्तजनका अति प्यारा ॥
मुरली बजाइ वनमा रम्ने, प्रेमरसका सागर ।
राधापतिको चरणकमलमा नमन, हे घनश्याम ॥
नन्दलाल हे यशोदानन्दन, दीनदयाल कृपालु ।
जन्म–मरणको बन्धनबाट मुक्त गरिदेऊ कृपालु ॥
कालिय मर्दन लीला तिम्रो, गोकुल भयो पावन ।
भक्तको आँसु देख्नासाथ, बग्छ करुणा सावन ॥
जय गोविन्द जय गोपाल, जय गोपीजनवल्लभ ।
नामस्मरणले मुक्ति देऊ, हे माधव हे घनश्याम ॥
भक्तवत्सल भगवान् को……… जय…….।
भजन 2
भजे रामानुजम् – वैष्णव–कीर्तनम्
वैष्णवधर्मप्रकाशकं श्रीरङ्गनाथपदाश्रितम् (श्रीरङ्गनाथपदाश्रितम् – 2) भजे रामानुजं ॥ 1 ॥
शरणागतत्राणपरायणं दयासिन्धुं कृपालयम् (दयासिन्धुं कृपालयम् – 2) भजे रामानुजं ॥ 2 ॥
न जातिभेदं न भक्तिभेदं लोकहिताय समर्पितम् (लोकहिताय समर्पितम् – 2) भजे रामानुजं ॥ 3 ॥
प्रेमैव धर्म इति दर्शयन्तं मोक्षधर्मप्रतिष्ठितम् (मोक्षधर्मप्रतिष्ठितम् – 2) रामानुजं भजे रामानुजं ॥ 4 ॥
वेदान्ततत्त्वप्रबोधकं वैष्णवमार्गप्रकाशकम् (वैष्णवमार्गप्रकाशकम् – 2) भजे रामानुजं ॥ 5 ॥
शरणागतिमार्गप्रदायकं देवघाट विराजितम् (देवघाटविराजतम् – 2) भजे रामानुजं ॥ 6 ॥
श्रीभाष्यकारमहायोगिनं रामानुजाचार्यवर्यम् (रामानुजाचार्यवर्यम् – 2) भजे रामानुजं ॥ 7 ॥
श्रीभाष्यकार महायोगिनं (मंत्रदान कृपाकरम् – 2) भजे रामानुजं ॥ 8 ॥
रचना विवरण
रचनाकारः : नारायण प्रसाद अधिकारीः
रचना–स्थलम् : काठमाडौँ,नेपाल
रचना–मितिः : 23 December 2025 (वि.सं. 2082 पौष 8)
भैरवी/खमाज अनुसार गाउन योग्य
